Community · 10 October 2026
दिल्ली के ईसाइयों ने भारत के लिए की प्रार्थना, एकता और सच्ची मसीही गवाही का किया आह्वान
दिल्ली में विभिन्न ईसाई समुदायों ने भारत की शांति, राष्ट्रीय एकता और धार्मिक सद्भाव के लिए प्रार्थना की तथा विश्वास, सेवा और करुणा के माध्यम से मसीही संदेश फैलाने का आह्वान किया।
नई दिल्ली, 3 अक्टूबर 2026: भारत में शांति, राष्ट्रीय एकता और धार्मिक सद्भाव के लिए प्रार्थना करने हेतु विभिन्न ईसाई संप्रदायों के लोग 2 अक्टूबर को नई दिल्ली में एकत्र हुए। “Pray for India 2026 – Bless India” नामक इस अंतर-संप्रदायिक कार्यक्रम का आयोजन महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर किया गया।
दिल्ली क्रिश्चियन पास्टर्स फेलोशिप द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न चर्चों, ईसाई संगठनों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान प्रार्थना, आराधना, बाइबल पाठ, चिंतन और आपसी संगति के माध्यम से भारत के कल्याण के लिए प्रार्थना की गई।
प्रेम और सेवा के माध्यम से मसीह की गवाही देने का संदेश
दिल्ली के आर्चबिशप अनिल जे. टी. कॉउटो ने अपने उद्घाटन संबोधन में ईसाइयों से अपने जीवन के माध्यम से सुसमाचार की सच्ची गवाही देने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वासियों को प्रेम, एकता, सेवा और अच्छे कार्यों के द्वारा अपने मसीही विश्वास को प्रकट करने के लिए प्रेरित किया।
महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रतिभागियों से आत्मचिंतन करने और यह विचार करने का आह्वान किया कि लोगों के बीच विभाजन क्यों हैं तथा उन्हें दूर करने के लिए क्या बदलाव आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वासियों को सुसमाचार के मार्ग पर चलने और अपने जीवन में प्रेम तथा सेवा को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया।
भारत की शांति और जरूरतमंदों के लिए प्रार्थना
कार्यक्रम में भारत के भविष्य, राष्ट्रीय एकता, धार्मिक सद्भाव, न्याय और सुशासन के लिए विशेष प्रार्थनाएँ की गईं। प्रतिभागियों ने चर्चों, परिवारों और विभिन्न समुदायों के बीच मेल-मिलाप तथा आपसी समझ बढ़ाने के लिए भी प्रार्थना की।
युद्ध और संघर्ष से प्रभावित देशों के लिए प्रार्थना करते हुए विश्व नेताओं से शांति और न्याय स्थापित करने की दिशा में कार्य करने का आग्रह किया गया।
इसके अतिरिक्त, हिंसा, गरीबी और उपेक्षा से प्रभावित महिलाओं और लड़कियों, बच्चों, परिवारों, गरीबों, वंचित समुदायों तथा हिंसा के पीड़ितों को भी प्रार्थनाओं में याद किया गया। भारत में शिक्षा के क्षेत्र के लिए भी विशेष प्रार्थना की गई।
विभिन्न चर्चों की एकजुट भागीदारी
कार्यक्रम में बाइबल पाठ, सामूहिक आराधना, गायन मंडलियों की प्रस्तुतियाँ, प्रार्थना नृत्य, वाद्य संगीत, नाटिकाएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। विभिन्न ईसाई परंपराओं के लोगों की भागीदारी ने चर्चों के बीच एकता और आपसी सम्मान का संदेश दिया।
कार्यक्रम का समापन चर्च के नवीनीकरण के लिए प्रार्थना, आशीर्वाद समारोह और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि विभिन्न चर्च परंपराओं से जुड़े ईसाई प्रार्थना, विश्वास, सेवा और देश के कल्याण के लिए एक साथ आ सकते हैं। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि ईसाई एकता का अर्थ सभी परंपराओं का एक जैसा होना नहीं, बल्कि विविधता का सम्मान करते हुए शांति और सेवा के साझा उद्देश्य के लिए मिलकर काम करना है।
विभिन्न चर्चों की एकजुट भागीदारी
कार्यक्रम में बाइबल पाठ, सामूहिक आराधना, गायन मंडलियों की प्रस्तुतियाँ, प्रार्थना नृत्य, वाद्य संगीत, नाटिकाएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल थे। विभिन्न ईसाई परंपराओं के लोगों की भागीदारी ने चर्चों के बीच एकता और आपसी सम्मान का संदेश दिया।
कार्यक्रम का समापन चर्च के नवीनीकरण के लिए प्रार्थना, आशीर्वाद समारोह और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि अलग-अलग चर्च परंपराओं के बावजूद ईसाई समुदाय प्रार्थना, सेवा और देश के कल्याण के लिए एक साथ आ सकते हैं। यह कार्यक्रम भारत में शांति, सद्भाव और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने में विश्वासियों की भूमिका की याद दिलाता है।

